Comfort Zone kya hai ? Comfort Zone से बाहर कैसे निकले ?

हम सभी लोग कंही न कंही अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं . हम सपने भी बड़े -बड़े देखते है , जैसे हमारे पास बंग्ला हो ,गाडी हो , नौकर हो , देश - विदेश घूमने जाएँ इत्यादि - इत्यादि. लेकिन हममे से कुछ ही लोग अपने सपनो को पूरा कर पाते हैं, जबकि बहुत से लोगों के सपने सिर्फ सपने बनकर ही रह जाते हैं. ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोगों ने अपने सपने को पूरा कर लिया और अपनी जिंदगी में एन्जॉय कर रहे हैं ? जबकि बहुत सारे ऐसे भी लोग हैं जिनकी यथास्थिति बनी हुयी है. अर्थात जैसे पहले थे वैसे ही अब भी है. कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है.



ये बहुत बड़ा सवाल है हमारे लिए!!!!! आखिर हम क्यों यथास्थिति बनाये हुए हैं ? क्यों हमारी परिस्थितियों में बदलाव नहीं आ रहा है ? क्यों हम हमारी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं ? क्यों हम बदहाल सी जिंदगी जी रहें हैं ?आखिर कब हमारे सपने पुरे होंगे ???? क्यों क्यों क्यों ?????


दोस्तों इन सभी "क्यों" का एकमात्र कारण है , हमारा COMFORT ZONE में रहना. आज के इस आर्टिकल में हम लोग Comfort Zone के बारे में समझेंगे और इससे बाहर कैसे निकले यह जानेगें. तो दोस्तों आप सभी से अनुरोध है कि इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें , हो सकता है कि यह आर्टिकल आपकी लाइफ में कोई बहुत बड़ा बदलाव लाये.


Comfort Zone क्या होता है ?

Comfort Zone का अर्थ उसके शब्द में छुपा है, जैसे Comfort का मतलब होता है "आराम" और Zone का अर्थ है "जगह" . अर्थात ऐसी जगह , एक ऐसा छेत्र जंहा पर आपको सुख और आराम मिलता हो , उसे हम Comfort Zone कह सकते हैं. 

उदहारण के तौर पर देखा जाये तो जैसे मैं किसी एक IT कंपनी में Job कर रहा हूँ , और एक पोजीशन पाने के बाद शांति से काम को करते जा रहा हूँ. जो शैलरी मिल रही है , उसी में खुश हूँ और ज्यादा मेरी शैलरी बढ़ जाए इसका कोई प्रयास भी नहीं किया जा रहा है. कंपनी को छोड़कर किसी दूसरी जगह जाने का रिस्क नहीं ले रहा हूँ. कुल मिलाकर कोई भी इस तरह का प्रयाश नहीं कर रहा हूँ जिससे मेरी शैलरी , मेरी पोजीशन बढ़ सके और अगर कर भी रहा हूँ तो वह काफी नहीं है. 


कैसे पता लगाएं कि आप Comfort Zone में हैं :


अक्सर हम लोग किसी एक स्थान पर आकर रुक जाते हैं और उसके आगे जाने की नहीं सोचते हैं.  होता यह है कि अभी आप जो भी कर रहे हैं , वही करते रहे और कुछ नया करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं. इसका एक अर्थ यह भी है कि आप कम्फर्ट जोन में आ चुके हैं और यह ऐसी जगह होती है जहां पर पहुंचकर आप कुछ अलग करना नहीं चाहते हैं. 

दोस्तों कभी कभी मुझे यह सवाल अपने आप से होता है कि,  क्या मैं कम्फर्ट जोन में तो नहीं जी रहा हूँ ? 
हो सकता है कि यही सवाल आप भी अपने आप से पूछ रहे हों. आखिर कैसे पता लगाया जाए कि आप Comfort Zone में जी रहे हैं ?

दोस्तों मैं आपको बताता हूँ कि आप कैसे पता कर सकते हैं कि आप Comfort Zone में हैं या नहीं. 

Comfort Zone के Symptoms ( लक्षण ) :-

आलस्य : 
दोस्तों आलस्य यह एक ऐसी समस्या है जिसके कारण हमारा और आपका ग्रोथ रुक जाता है. किसी भी काम को देर से करना या बे-मन से करना , या बेढंग से करने को आलस्य कहा जा सकता है. अगर आप समय पर अपने कार्य को नहीं कर रहे हैं तो आप आलसी हो चुके हैं. जैसे प्रतिदिन सुबह उठाकर जिम जाना , ऑफिस समाय पर न पहुंच पाना. 

नींद ज्यादा लेना :
क्या आपको ज्यादा नींद आती है ? क्या आप सुबह समय से उठ नहीं पाते हैं ? क्या आप मानक नींद से ज्यादा सो रहे हैं ? यदि इसका उत्तर हां है तो आप ज्यादा नींद के आदि हो चुके हैं और आप Comfort Zone में रह रहे हैं. इससे तुरतं बाहर निकलिए. 


कार्यों को लगातार टालना :
दोस्तों कुछ लोगों की आदत होती है ,कार्य को दूसरे दिन पर टालने की. जैसे मैं अपने बेटे के आधार कार्ड बनवाने को टाल रहा हूँ. मुझे पता है आधार कार्ड की क्या उपयोगिता है फिर भी टाले जा रहा हूँ. ऐसा करना दर्शाता है कि मैं भी Comfort Zone की गिरफ्त में आ चूका हूँ.

काम की चिंता करना लेकिन काम न करना :
दोस्तों मेरा एक मित्र है , मुझसे जब मिलता है तब नए नए बिज़नेस के आईडिया शेयर करता है , लेकिन कभी भी उसे एक्सक्यूट ( शुरुवात ) नहीं करता है. और इस कारण वह कोई भी बिज़नेस को शुरू नहीं कर पा रहा है. यदि ऐसे कोई गुण आपके अंदर भी है तो उसे तुरंत डिलीट कर दें , और किसी भी कार्य की सिर्फ चिंता ही नहीं बल्कि उसे जल्द से जल्द एक्सक्यूट करें. काम की चिंता के साथ - साथ execution (अमल में लाना ) बहुत जरुरी है. 

ज्यादा से ज्यादा मोबाइल पर Time Pass करना :
मोबाइल , लैपटॉप या अपने कंप्यूटर में गेम खेलना आज कल के नवयुवक की आदत बनती जा रही है. मैंने अक्सर अपने मोहल्ले के लड़कों को देखा है कि किसी गेम को आपस में मिलकर देर रात तक मोबाइल में खेलते हैं. ऐसा करने के बाद सुबह से देर उठना उनकी आदत बन गयी है. दोस्तों यह सब गलत आदत है. इन सभी आदतों को छोड़कर , अपने Comfort Zone से बाहर निकलिए. 


Comfort Zone के फायदे और नुकसान :

दोस्तों Comfort Zone का फायदा तो मुझे समझ में नहीं आता है लेकिन इसके नुकसान बहुत ज्यादा हैं. जब हम जरुरत से ज्यादा आराम करने लगते हैं तब हमारा शरीर उस आराम का आदि हो जाता है और जब जरुरत पड़ती है तब शरीर से ज्यादा वर्क नही हो पाता है. ज्यादा आराम मिल जाने से शरीर आलसी हो जाता है , उसे अपने अंदर की अथाह शक्तियों की समझ नहीं हो पाती है और भविष्य में आने वाले चैलेंज को फेस नहीं कर पाता है. 

दोस्तों Comfort Zone की वजह से हम Successful नहीं हो पाते हैं, Risk लेने से डरते हैं. 

Comfort Zone के नुकसान : 
  • नए जॉब के लिए प्रयत्न न कर पाना. 
  • अच्छी सैलरी से वंचित रह जाना.
  • किसी नए शहर में बसने का डर.
  • बिज़नेस में लॉस होने का मौका देना.
  • आत्मविश्वास में निरंतर कमी. 


Comfort Zone से बाहर कैसे निकलें :


दोस्तों हम और आप कभी भी Risk नहीं लेना चाहते हैं. तो क्या ऐसे में , हमारे सपने पूरे हो पाएंगे ? यह प्रश्न हमेशा हमारे साथ रहता है . हम तो हमेशा यही सोचते हैं कि हमारी जरूरते तो पूरी हो रही है, तो फिर किसी बात की चिंता नहीं है. लेकिन क्या हम अपने बड़े सपनों को पूरा कर पा रहे है? 

इसका उत्तर है नहीं!! , हम अपने सपनों को पूरा नहीं कर पा रहे है , हम बस जिंदगी जी रहे हैं और थोड़ी बहुत , छोटी - छोटी खुशियों में मजे कर रहे हैं.

हमे हमारे सपनों को पूरा करने के लिए, Comfort zone से निकल कर कुछ नया करना होगा. अक्सर हम अपने comfort zone से बाहर नहीं निकल पाते हैं. वंहा पर बहुत सारे रुकावट आने लगती है जैसे - आलसपन , किसी भी काम को टालते रहना , मन में डर का होना , किसी काम के लिए अपने आप को तैयार न कर पाना , सही निर्णय न ले पाना, ऐसे बहुत सी बाते है जो हमें comfort zone से बाहर नहीं निकलने देती है.


एक कहावत है कि -
मेंढक जब तक कुएँ में रहता है ,उसे दुनियाँ उतनी ही बड़ी दिखाई देती लेकिन जब मेंढक कुएँ के बहार निकलता  है तब उसे समझ आता है कि दुनियाँ तो बहुत बड़ी है. वैसे ही जब तक हम अपने comfort zone में रहते हैं तब तक हमे बड़ा आराम लगता है. हमे लगता है की यह आराम , सुख जो मिल रहा है वह पर्याप्त है.  दोस्तों जब तक Comfort Zone से बाहर नहीं निकलेगे, तब तक हमें भी यही लगेगा की बस इतनी ही जिंदगी है जबकि सच्चाई इसके बिपरीत है. 


सबसे पहले अपने आप को बदलो :

Comfort Zone से बाहर निकलने के लिए सबसे पहले अपने आप को बदलना होगा और अपने आरामदायक स्थान से बहार निकलना होगा. आपको कुछ नया करने के लिए सोचना होगा, कुछ नया करने चाहत पैदा करनी होगी. अपने सपने को पूरा करने के लिए निरंतर आगे बढ़ना होगा. जब आप खुद बदलोगे तो आप अपने लोगो को भी बदल सकते हो. 

कहते है कि जिस वातावरण में हम रहते है उसका असर हम पर भी होता है. जैसे दस मूर्खों के साथ एक विद्वान को रखा जाय तो वह विद्वान् भी मूर्ख हो जाता है. संगति का असर हम पर जल्दी होता है इसलिए हमें अच्छे लोगो की संगति में रहना चाहिए. खुद भी आगे बढ़े और दुसरो को भी आगे बढ़ने दे.

हमें हमेशा कुछ नया करने के लिए सोचते रहना चाहिए :

जीवन में हमेशा कुछ नया करने के लिए, नया सिखने के लिए , कुछ न कुछ सोचते रहना चाहिए. जब हम कुछ करने के लिए सोचेंगे तभी हमारी आगे बढ़ाने की इच्छा भी जगृत होगी. हमें हमेशा खुद को खुद से ज्यादा बेहतर बनाते रहना होगा. हमें अपने कामो को नए - नए तरीके से करने का प्रयास करते रहना होगा. जिस काम को करने में ऊब जाते है उसे कैसे मनोरंजक बनाये. इन सारी बातो का ध्यान देना होगा.


लक्ष्य बनाकर कार्य करे :

कई बार जब कोई भी काम करते है तो उसका कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं होता ,हम केवल कार्य को  करते जाते है. जब कोई व्यक्ति comfort zone से बाहर नहीं निकलेगा तब वह कुछ ज्यादा सोच भी नहीं पता है. लेकिन जब हम comfort zone से बाहर निकलकर अपना लक्ष्य खुद बनाकर काम करेंगे तो हमारे सोचने -समझने का तरीका भी बदल जाता है. तब हम अपने काम को और बेहतर तरीके से कर पाएंगे. तब हम अपने जीवन को जैसा चाहेंगे वैसा बना पाएंगे. 


अपनी सोच को बदलो :

कई बार हम कुछ ऐसा सोचने लगते है जो नहीं सोचना चाहिए. हमारी गलत सोच के कारण हम कामयाब नहीं हो पाते हैं. हमारे मन में कुछ अलग ही चलता रहता है , जैसे मैं ये काम कर रहा हू तो लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे ? 

जब तक हम अपनी सोच नहीं बदलेंगे लोग हमें नहीं बदलने देंगे. हमें अपनी सोच और अपने आप को बदलना होगा, वह भी बिना किसी की परवाह किये. जिस नजरिये से आप अपने आपको देखेगे उसी नजरिये से दुनिया के लोग भी आपको देखेंगे. 


सोच बदलो ,खुद को बदलो ,दुनिया बदल जाएगी।



लोगो की बातो में मत आओ, और लोगों की चिंता मत करो :

कई बार ऐसा होता है कि हम दूसरों के बारे में बहुत ही ज्यादा आ जाते हैं और ज्यादा सोचने लगते है. जैसे - मैं ये जो कार्य करने जा रहा हू सही है कि नहीं ? लोग मुझे क्या बालेंगे ? लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे ? हम इन सबको ज्यादा महत्त्व देने लगते है और comfort zone से बाहर नहीं निकल पाते है. 

कभी - कभी हमें यह लगता है कि लोग जो बोलते है वो सही है. लेकिन कभी - कभी ऐसे लोगो की सलाह भी हमें आपत्ति में डाल देती है. क्योकि वो लोग अपने ही बराबरी की राय दे सकते है. इसलिए हमें लोगो की बातो में नहीं आना चाहिए. जब हमें कुछ समझ में न आये तो किसी अनुभवी की सलाह लेनी चाहिए और अपने कॅरियर , अपने कार्य की शुरुआत करनी चाहिए.

कम्फर्ट जोन की वजह से हम अपने कार्य को सही तरीके से नहीं कर पाते हैं और असफलता के शिकार हो जाते है. हमें अपनी इस सोच को बदलना होगा और comfort zone से निकलकर अपनी खूबियों को पहचनना होगा ,तभी हमको एक कामयाब जीवन जीने के लिए मिलेगा.


आप अपने इच्छाओं को मजबूत करें :

लोग बड़े - बड़े सपने देखते है, बड़े-बड़े ख्वाब देखते है और कहते भी हैं किं - मैं ये करूँगा , मै वो करूँगा. लेकिन जब कार्य को शुरुवात करने की बात होती है, तब कही न कही उनकी इच्छाशक्ति कमजोर होने लगती है और तभी वो अपने comfort zone से बाहर नहीं निकल पाते हैं और अपनी इच्छाओ को दबा देते है। दोस्तों याद रहे मन के हारे हार है और मन के जीते जीत. इसलिए अपनी इच्छा शक्ति को कभी भी न मरने दें. 


मन के हारे हार है और मन के जीते जीत


नए - नए चीजों को सीखना :

हम सब को नयी - नयी चीजों को सीखते रहना चाहिए। हर समय हमारे आस - पड़ोस कुछ न कुछ नया होता ही रहता है. हमें भी नया सीखना चाहिए जिसमे हमें चुनौती का सामना करना पड़े. जिस काम को हम आसानी से कर लेते है, समझ लो कि हम comfort zone में है. और काम को करने के लिए अगर हमें चुनौती का सामना करना पड़ता है ,तब हमें समझ लेना चाहिए कि अब comfort zone से बाहर निकल गए है. याद रहे कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर ही  हम नयी - नयी चीजों को सीख सकते है.


हमें रिस्क लेते रहना चाहिए:

जब हम comfort zone में रहते है, तब कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहते. ऐसे में हम उतने में ही सिमट कर रह जाते है और अपने आप में कोई बदलाव नहीं कर पाते हैं. Comfort Zone में रहकर हम अपनी जिंदगी को जैसे - तैसे चलाते है, और इसी के साथ अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाते हैं. दोस्तों जब तक जीवन में रिस्क नहीं लेंगे तब तक हमारा आत्मविश्वास मजबूत नहीं मजबूत होगा. हम अपनी कमजोरीयों को समझ नहीं पाएंगे. हमें अपने आत्मविश्वास को मजबूत बनाना होगा. अपने comfort zone से बाहर निकलकर रिस्क लेना होगा , तभी हमारा विकास हो पायेगा.

हारना तब आवश्यक हो जाता है जब लड़ाई अपनों से हो,
और जितना तब आवश्यक हो जाता है जब लड़ाई अपने आप से हो. 

प्रतिदिन Motivational Quotes को पढ़ें :

दोस्तों Motivational Quotes को पढ़ने से हमारे मन में एक अद्भुत ऊर्जा पैदा होती है. इससे हम सकारात्मक बने रहते हैं. इसलिए समय - समय पर अच्छे - अच्छे Quotes , Motivational Quotes , सकारात्मक कोट्स पढ़ते रहना चाहिए.

अपने डर को अपने ऊपर हावी मत होने देना :

दोस्तों सबसे अंत में मैं यह कहूंगा कि अपने डर को अपने अंदर से बाहर निकाल फेकिये। यही डर हमे कुछ नया करने से रोकता है. जब तक यह डर हमारे अंदर होगा तब तक हम नया कुछ नहीं कर पायेंगे. कोई रिस्क नहीं ले पाएंगे. 

हम बहुत पुरानी कहावत सुने हैं कि -- डर के आगे जीत है !!!!


दोस्तों यह आर्टिकल आपको कैसा लगा , हमे अपने कमैंट्स के माध्यम से जरूर बतायें और अपने दोस्तों से जरूर शेयर करें. 

धन्यवाद !!! 

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