Guru Nanak Jayanti Essay in Hindi.

गुरु नानक जी सिख धर्म के प्रथम गुरु माने जाते है। गुरु नानक जी को इनके अनुयायी , नानक , नानक देव जी , बाबा नानक और नानकशाह नामों से संबोधित करते हैं।  सबसे प्रसिद्ध सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का सिख धर्म समुदाय के द्वारा बहुत सम्मान किया जाता है। नानक जी की जयंती को सिख धर्म में सबसे पवित्र त्यौहार माना  जाता है। दस सिख गुरुओं में से सबसे पहले गुरु नानक देव जी की  जयंती को मनाया  जाता है।  सिखों का मानना है कि जुरु नानक देव जी ही इस दुनिया में ज्ञान लेकर आये थे। 

Guru Nanak Jayanti Essay in Hindi.


सिख धर्म के 10 गुरु :

सिख धर्म में कुल 10 गुरु हुए जिनमे प्रथम गुरु नानक देव और अंतिम गुरु गोविन्द सिंह जी हैं। 

  1. गुरु नानक देव 
  2. गुरु अंगद देव 
  3. गुरु अमर दास 
  4. गुरु राम दास 
  5. गुरु अर्जुन देव 
  6. गुरु हरगोविंद 
  7. गुरु हर राय 
  8. गुरु हर किशन 
  9. गुरु तेग बहादुर 
  10. गुरु गोविन्द सिंह 


गुरु नानक देव :

गुरु नानक देव का जन्म 1469 को  राय भोकी तलवंडी ( यह स्थान अब पकिस्तान में है ) में हुआ। यह स्थान लाहौर से लगभग 55 मील उत्तर-पश्चिम में है। उनके पिता, मेहता कालू एक पटवारी थे- सरकार में भू-राजस्व के एक लेखाकार। गुरु की माता माता तृप्ता थीं और उनकी एक बड़ी बहन बीबी नानकी थी। बचपन से ही बीबी ननकी ने उनमें ईश्वर का प्रकाश देखा लेकिन उन्होंने यह रहस्य किसी को नहीं बताया। उन्हें गुरु नानक की पहली शिष्या के रूप में जाना जाता है। इनके जन्म तारीख को लेकर काफी विवाद रहा है , लेकिन सिख धर्मं में कुछ विद्वान् इनकी जन्मतिथि 15 अप्रैल 1469 को मनाते है।  

गुरु नानक देव जी बचपन से ही प्रखर बुद्धि के थे। इनका पढ़ने में मन नहीं लगता था। छोटी सी उम्र में ही इन्होने आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में अपना सारा समय व्यतीत करने लगे। इनके साथ बचपन में कई ऐसे चमत्कारिक घटनाएं घटी जिन्हे देखकर गाँव के लोग इन्हे दिव्य व्यक्तित्व मानने लगे। गुरु नानक को पूजने वालों में इनकी बहन और गाँव के प्रमुख राय बुलार प्रमुख थे। 

गुरु नानक जी का विवाह बालपन में मात्र 16 वर्ष की उम्र में ही हो गया था। इनकी पत्नी का नाम सुलक्खनी था, जो गुरुदासपुर की रहने वाली थी। गुरु नानक जी को 2 पुत्र थे जिनका नाम क्रमशः श्रीचन्द्र और लखिमदास था। 

गुरु नानक जी ने कई तीर्थ यात्राएं की थी। वे घूम घूम कर उपदेश करने लगे थे। इन्होंने पकिस्तान , अफगानिस्तान , अरब के कई देशों में भी यात्रा किये और अपने उपदेश लोगों को दिए। इन यात्राओं को पंजाबी में उदासियाँ कहा जाता है। 


गुरु नानक जयंती कब और कैसे मनाया जाता है ?

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी का जन्म को लेकर कुछ विद्वानों  और संगठनों का मानना है कि जुरु जी का जन्म वैशाखी को मनाया जाना चाहिये। नानकीशाही  कैलेंडर के अनुसार 14 अप्रैल को पड़ता है। जबकि,कई लोग और संगठन पारंपरिक तारीख को मानते हैं । वास्तव में नानकाशाही कैलेंडर परंपरा  का पालन करती है और इसे संतो के मांग के कारण इसे कार्तिक पूर्णिमा पर मनाया जाता है। यह दिन दीपावली के 15 दिन बाद पड़ता है। 
         
                  गुरु नानक जयंती पुरे देश में बड़े ही धूम -धाम से मनाया जाता है। यह समारोह दो दिन पहले ही गुरुद्वारा में शुरू हो जाता  है। यंहा पर अखंड पाठ (48 घंटे का बिना रुके ) गुरु ग्रंथ साहिब का  आयोजित किया जाता है। गुरु नानक जी के जन्म  दिन से एक दिन पहले नगरकीर्तन जुलूस का भी आयोजन किया जाता है। इस आयोजन का नेतृत्व पांच लोगो  द्वारा किया जाता है। जिन्हे पंच प्यारे भी कहा  जाता है ,जो सिख त्रिकोणीय ध्वज ,निशान साहिब धारण करते है। जुलुश के दौरान गुरु ग्रन्थ साहिब को पालकी में  बिठाकर पुरे नगर में घुमाया जाता है। लोग समूह में भजन -कीर्तन करते हैं , और पारम्परिक संगीत और वाद्ययंत्र भी बजाया जाता है। सिख लोग अपने मार्शल आर्ट का भी प्रदर्शन करते है। 


सिख धर्म में गुरु नानक जी का महत्व और इतिहास :


               गुरु नानक जी का ये ढृढ़ विश्वास था कि कोई भी व्यक्ति ईमानदारी से पार्थना के माध्यम से ईश्वर से जुड़ सकता है। नानक जी ने उन परम्पराओं को प्रोत्साहित नहीं किया जिनमे बलिदान शामिल थे। गुरु ग्रन्थ साहिब नामक पवित्र पुस्तक में उनके सभी शिक्षाओं और उपदेशों को एक साथ लिखा गया। यह सिख धर्म का सबसे पवित्र धर्मिक ग्रन्थ है। जिसे सिख धर्म के अनुयायी अंतिम ,संप्रभु और शाश्वत गुरु भी मानते है।  गुरु ग्रन्थ साहिब जी ने अपने मुख्य छंदो में विस्तार से बताया  है कि पुरे ब्रह्माण्ड का निर्माता एक ही है । नानक जी  छंदो के भेदभाव के बावजूद मानवता ,समृद्धि सामाजिक न्याय के लिए भी निःस्वार्थ सेवा का उपदेश देते थे। गुरु नानक जी देव जी के जीवन उपलब्धियों और उनकी महत्वपूर्ण विरासत का सम्मान करने के लिए गुरु नानक जयंती मनाई जाती है। 

         
           गुरु नानक जयंती का जुलूस शहर की सड़को पर निकाला जाता है। इस विशेष अवसर पर लोग सड़को को फूलो और झंडो से सजाते है, और  नानक जी के सन्देश का प्रचार -प्रसार करते है। गुरु पर्व के दिन समारोह सुबह 4 /5 बजे शुरू होता है। दिन के इस समय को अमृत वेला भी कहा जाता है। दिन की शुरुआत आसा - की - वार (सुबह के भजन ) के गायन से शुरू होता है और कथा पाठ भी होता है। उसके बाद लंगर गुरुद्वारों में आयोजित किया जाता है। इस मुफ्त सांप्रदायिक भोजन के पीछे यह विचार है कि किसी भी जाती के लोगो को भक्ति भाव से भोजन से तृप्त करवाना। 


                       कुछ गुरुद्वारों में रात में भी प्रार्थना भजन का आयोजन किया जाता है जो सूर्यास्त के आस -पास शुरू किया जाता है और देर रात तक भजन कीर्तन किया जाता है। मंडली देर रात को गुरुबानी गाना शुरू करते है। इस समारोह को विशेष रूप से पंजाब ,हरियाणा और चंडीगढ़ में मनाया जाता है। इस त्यौहार को कई अन्य स्थानों जैसे - पाकिस्तान ,इंग्लैंड के कुछ राज्यों में मानते है वही कुछ सिंधी लोग भी इस त्यौहार को मानते है। 


दर्शन :

गुरु नानक जी सर्वेश्वरवादी थे। उन्होंने मूर्तिपूजा के विपरीत एक परमात्मा की उपासना और मानवता का संदेश लोगों को दिया। उन्होंने हिन्दू धर्म के सुधार के लिए  भी कई महत्वपूर्ण कार्य किये थे। 
 

मृत्यु :

गुरु नानक जी की मृत्यु 22 सितंबर 1539 को हुआ। जीवन के अंतिम दिनों में इनकी ख्याति बहुत ज्यादा बढ़ गयी थी। गुरु नानक जी ने करतारपुर नामक एक नगर बसाया था , जो की अब पकिस्तान में है। इसी स्थान पर गुरु नानक जी का परलोक वास हुआ था। 


नानक जी के कुछ अमृतवाणी
 
श्री सतनाम जी वाहे  गुरु जी ,श्री सतनाम जी वाहे गुरु जी। 
सतगुरु दीन दयाल है ,सतगुरु है किरपाल 
शरण श्री वही गुरु की कर देते है निहाल 
अमृत जैसा है सदा वाहे गुरु का नाम,
जिसने मन से है जपा पाया हरि का धाम।  
वाहे गुरु की सीख जो चित से सदा है लगाये ,
मन के अवगुण सब धुले तन पावन हो जाये। 
आदी गुरु गुरु नानक का साँचा है दरबार ,
सतगुरु  गुरु की संसार में सच्ची है सरकार। 
श्री सतनाम जी ,वाहे  गुरु जी ,
श्री सतनाम जी ,वाहे गुरु जी चित। 
अजर अमर संसार में ,वाहे गुरु का नाम ,
जो चित इसे लगाए वो पाए गुरु का धाम।  
वाणी जो सतनाम की ध्यान धरे दिन रात ,
किरपा वाहे गुरु जी की रहती उसके साथ। 
वाहे गुरु की वाणी से मिले मुक्ति की राह ,
गर तू सिमरन की रख ले ,अपने मन में चाह। 
अमृत है गुरु की वाणी विष सारे करे दूर, 
जीवन में  आंनद परम देती है भरपूर। 
श्री सतनाम जी वाहे गुरु जी 
श्री सतनाम जी वाहे गुरु जी।

वाहे गुरु जी का खालसा ,वाहे गुरु जी कि फ़तेह।।

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