Sardar Vallabh Bhai Patel Biography in Hindi - सरदार वल्लभ भाई पटेल.

वल्लभ भाई झावेर भाई पटेल को हम भारतीय लोग प्यार से सरदार पटेल , लौहपुरुष इत्यादि नामों से जानते हैं.  जी हाँ दोस्तों सरदार पटेल का पूरा नाम वल्लभ भाई झावेर भाई पटेल था. झावेर भाई इनके पिता तो माता का नाम लाडबा बाई था. अपने माता - पिता की ये चौथी संतान थे ,  इनका जन्म एक पटेल ( पाटीदार ) जाति में हुआ था. 

Sardar Vallabh Bhai Patel Biography in Hindi - सरदार वल्लभ भाई पटेल।

जीवन परिचय :

सरदार पटेल जी का जन्म 31 October 1875 गुजरात के नडियाद नामक गांव में हुआ था. इनका जन्म एक लेवा पटेल (पाटीदार ) जाति में हुआ था. इनके पिता का नाम झावेर भाई पटेल और माता जी नाम लाडबा देवी था. सरदार जी के चार भाई और एक बहन थी. भाई -सोमाभाई पटेल ,नरसीभाई पटेल ,विठ्लभाई पटेल,काशीभाई पटेल और बहन का नाम दाहिबेन पटेल था. इनकी पत्नी का नाम झावेर बा था.

इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गुजरात में ही हुआ था. सरदार जी 22 साल की उम्र में 10वी की परीक्षा पास किये. पटेल जी एक साधारण व्यक्ति थे, परन्तु वे एक मजबूत इरादे के व्यक्ति थे. वे एक वकील बनना चाहते थे इसलिए इन्होंने 36 वर्ष की आयु में अपने सपने को पूरा करने के लिए इंग्लैंड गए. सरदार पटेल जी ने 36 महीने का कोर्स 30 महीने में ही पूरा कर ली और भारत में आकर गुजरात के अहमदाबाद में वकालत शुरू किया.

नाम : वल्लभ भाई पटेल 
जन्म तारीख : 31st अक्टूबर 1875
जन्म स्थान : गांव - नडियाद , जिला -खेड़ा , राज्य - गुजरात 
पिता का नाम : झवेर भाई पटेल 
माता का नाम : लाडबा देवी 
भाई व् बहन : भाई - सोमा भाई , नरसी भाई , विट्ठल भाई | बहन - ?
पत्नी :झावेर बाई 
बच्चे : मणिबेन पटेल , दह्या भाई पटेल 
नागरिकता :भारतीय 
धर्म :हिन्दू 
जाति  :पटेल (पाटीदार )
उम्र : 75
शिक्षा : वकालत 
पेशा :वकालत , राजनीती 
मृत्यु तारीख :15 दिसंबर 1950
मृत्यु स्थान:  बॉम्बे ( अब मुंबई )
महत्वपूर्ण उपलब्धि : वकील , राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष , भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री , गृहमंत्री , भारत रत्न. 



सरदार जी की  कार्य शैली :

पटेल जी , महात्मा गांधी जी के कार्यो और आदर्शो से प्रेरित होकर भारत की स्वतंत्रता में शामिल हो गए. सरदार जी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए कर भुगतान के विरोध में खेड़ा ,बारडोली ,गुजरात और अन्य क्षेत्रों के किसानों को एकत्र किया और गुजरात में एक गैर -सविनय अवज्ञा आंदोलन की स्थापना की. यह आंदोलन बहुत बड़ा हुआ और सरदार पटेल जी अपने लक्ष्य में सफल हुए और तो और उस वर्ष ब्रिटिश सरकार को राजस्व कर भी माफ़ करना पड़ा. इसी कारण सरदार जी गुजरात के सबसे लोकप्रिय नेता बन गए और तभी से लोग इन्हे सरदार के नाम से पुकारने लगे. 

सन 1920 में सरदार पटेल जी गुजरात प्रदेश के कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष पद के रूप में नियुक्त किये गए ,और 1945 तक कार्यपद सम्हाले रहे. सरदार जी गाँधी जी के असहयोग आंदोलन के पूर्णरूप से समर्थक थे. सरदार जी ने गुजरात में भेदभाव ,छुआ -छूत और जातीय भेदभाव जैसी भावनाओ का खुब विरोध किया. सरदार जी 1922 , 1924 , और 1927 में अहमदाबाद की नगर पालिका के अध्यक्ष के रूप में चुने गए.

जब महात्मा गांधी जी जेल में थे तब सरदार पटेल जी भारतीय ध्वज फहराने को प्रतिबन्ध करने वाले अंग्रेजो के कानून के खिलाफ 1923 में नागपुर में सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व किया था. सरदार जी को 1931 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किये गए. इन्होने 1934 और 1937 में कांग्रेस के अखिल भारतीय चुनाव प्रसार में अहम भमिका निभाई. सरदार पटेल जी 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख नेता थे. इनके प्रमुख रूप से शामिल होने के कारण अंग्रेज पुलिस द्वारा उन्हे कैद कर लिया गया, और 1945 में उन्हें जेल से छोड़ दिया गया.


सरदार पटेल जी को लौह पुरुष क्यों कहा जाता है ?

भारत के स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल जी भारत के पहले गृह मंत्री व उप - प्रधान मंत्री चुने गए. इन्होने पंजाब और दिल्ली में शरणार्थियों के लिए शिविर का आयोजन किया. आजादी के बाद अधिकांश प्रान्तीय कांग्रेस समितियाँ पटेल जी के पक्ष में था. पटेल जी गाँधी जी की इच्छा का सम्मान करते थे और प्रधान मंत्री के पद से दूर रहे और नेहरू जी का समर्थन करने लगे. स्वतंत्रा मिलने के बाद सरदार जी को उपप्रधान मंत्री और गृह मंत्री का कार्य सौंप दिया गया.

सरदार पटेल जी को गृह मंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता थी , देशी रियासतों को भारत में मिलाना. इस कार्य को सरदार जी ने बिना किसी लड़ाई के कर दिखाया. लेकिन उन्हें हैदराबाद के ऑपरेशन पोलो
के लिए सेना भेजना पड़ी .  565 अर्द्ध - स्वायत्ता रियासतों का एकीकरण करके भारत को एकता के सूत्र में बांधने का श्रेय भी इन्हे ही जाता है. सरदार जी एक साहसी और ढृढ़ निश्चयी व्यक्ति थे, इसी कारण इन्हे लौह पुरुष के नाम से जाना जाता है.

सरदार जी का गाँधी जी के साथ गहरा सम्बन्ध था. इसी कारण गाँधी जी के मृत्यु के बाद से ही इनकी भी स्तिथि बिगड़ने लगी और गांधी जी के मृत्यु के दो महीने के अंदर ही 15 दिसम्बर 1950 में दिल का दौरा पड़ने के कारण सरदार पटेल जी निधन हो गया.


देशी राज्यों का एकीकरण :

स्वतंत्रता के समय भारत में 562 देसी रियासतें थी और इसका क्षेत्रफल 40 प्रतिशत था. सरदार जी ने आजादी के पहले से ही वीपी मेनन के साथ मिलकर कई देसी राज्यों को भारत में मिलाने का कार्य प्रारम्भ कर दिया. सरदार पटेल और वीपी मेनन जी के , देसी राजाओ को समझने के परिणाम स्वरूप तीन राजा को छोड़कर बाकि सभी राजाओ ने स्वेच्छा से भारत में मिलने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. जम्मू एवं कश्मीर ,जूनागढ़ और हैदराबाद के राजाओं ने ऐसा करना स्वीकार नहीं किया. जूनागढ़ के पास एक छोटी से रियासत थी जो चारो ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी. जूनागढ़ पाकिस्तान के नजदीक नहीं था ,वहा के नवाब ने 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान में मिलने की घोषणा की उस राज्य की सर्वाधिक जनता हिन्दू थी और वो भारत में मिलना चाहती थी. वहा के राजा के विरुद्ध तब भारतीय सेना जूनागढ़ में प्रवेश कर गयी. तब वहा का नवाब अपनी जान बचाकर पाकिस्तान चला गया . इस प्रकार  9 नवम्बर 1947 को जूनागढ़ भी भारत में मिल गया.

हैदराबाद भारत की सबसे बड़ी रियासत थी,और वो भारतीय भूमि से चारो ओर से घिरी थी. वहा के निजाम ने पाकिस्तान के प्रोत्साहन से स्वतंत्र राज्य का दवा किया और अपनी सेना भी बढ़ाने लगा. तब सरदार जी को चिंता होने लगी . अंततः भारतीय सेना 13 सितम्बर 1948 को हैदराबाद में प्रवेश कर गयी. तब तीन दिनों के बाद निजाम ने आत्मसमर्पण कर दिया और भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. नेहरू जी ने कश्मीर को अपने हिरासत में ले लिया और कहा कि ये समस्या अंतरराष्ट्रीय समस्या हैं. कश्मीर की समस्या को संयुक्त राष्ट्र संघ में लेकर गए. अलगाववादी ताकतों के कारण कश्मीर राज्य की समस्या दिन - प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी. परन्तु मोदी जी अथक प्रयास से , 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू - कश्मीर और लद्दाख लद्दाख रूप में दो केंद्र शासित प्रदेश भारत में शामिल हुए. जम्मू - कश्मीर केंद्र शासित के अधीन रहेगा और जो कानून भारत में लागू होते है वही कानून जम्मू -कश्मीर में भी लागू होंगे. सरदार जी पाकिस्तान की छल और चालाकी सतर्क थे वही देश के विघटन तत्वों से भी सावधान करते थे.


सरदार पटेल जी द्वारा लेखन कार्य एवं उनकी प्रकाशित पुस्तकें :

लगातार चुनौतियों से घिरे सरदार पटेल जी को लिखने का समय नहीं मिल पता था. लेकिन उनके द्वारा लिखे पत्रों ,टिप्पणियों तथा उनके व्याख्यानों के बहुत बड़ी साहित्य उपलब्ध है जिन्हे अनेको प्रकार से प्रकाशित किया गया है.
इन सबमे सबसे महत्वपूर्ण सरदार पटेल जी के वे पत्र लेखन है जो स्वतंत्रता संग्राम में दस्तावेज का महत्त्व रखते है. विभिन्न विषयो पर लिखित साहित्य तैयार करके अनेकों पुस्तके भी लिखी गयी.


उनके लिखे हुए पुस्तकें -



1 . सरदार पटेल : चुना हुआ पत्र व्यवहार
2 . सरदारश्री के विशिष्ट और अनोखे पत्र
3 . भारतविभाजन
4 . गाँधी ,नेहरू ,सुभाष
5 . आर्थिक एवं विदेश नीति
6 . मुसलमान और शरणार्थी
7 . कश्मीर और हैदराबाद
8 . Sardar Patel correspondence
9. The Collected Works of Sardar Vallabhbhai Patel


सरदार वल्ल्भभाई पटेल जी का सम्मान :

सरदार पटेल जी को मरणोपरान्त भारतरत्न से भी सम्मानित किया हैं. पटेल जी के सम्मान में अहमदाबाद के हवाई अड्डे का नामकरण करके उसका नाम सरदार वल्ल्भभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र रखा गया. गुजरात के वल्ल्भ विद्या नगर में सरदार पटेल विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है. इनके सम्मान व् स्मरण के लिये अनेको संस्थान केन्द्रो और ट्रस्टों की भी स्थापना की गयी है. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी इनके सम्मान में बनाया गया है, जिसकी ऊँचाई 240 की है, जिसमे की 58 मीटर का आधार बनाया गया है. इस मूर्ति की मूल उँचाई 182 मीटर की है ,जो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी दो गुना ऊँचाई है. सरदार बल्ल्भ भाई पटेल के 137 वीं जयंती पर गुजरात के मुख्य मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 31 अक्दूबर 2013 में गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार बल्ल्भभाई पटेल का स्मारक शिलान्याश की स्थापना किया। जिसका नाम "एकता की मूर्ति "स्टैचू ऑफ यूनिटी रखा गया है.


"सरदार बल्लभभाई पटेल एक ऐसे नेता थे जिन्हे भारत कभी भुला नहीं पायेगा. उनके बिना आज की भारत की कल्पना करना भी नामुमकिन है. उनके दूरंदेशी और राष्ट्र प्रेम की सदा प्रेरणा देते रहेंगी और हम उन्हें गर्व से सरदार कहते रहे. "


एक कविता सरदार जी के नाम :


लौह पुरुष की ऐसी छवि
ना देखि थी , ना सोची थी ,
आवाज में सिंह सी दहाड़
ह्रदय में कोमलता की पुकार
एकता का स्वरूप जो इसने रचा
देश का मानचित्र पल में बदला.


गरीबो का सरदार था वो,
दुश्मनो के लिए लोह समान था वो
आंधी की तरह बहता गया
ज्वालमुखी  सा धधकता गया

बनकर गाँधी का अहिंसा का शस्त्र
महकता गया विश्व में, जैसे कोई ब्रह्मस्त्र
इतिहास के गलियारे खोजते है जिसे
ऐसे सरदार पटेल,अब न मिलेंगे पुरे विश्व में.


जो भरा नहीं है भावो से
बहती जिसमे रसधार नहीं
ह्रदय नहीं वह पत्थर है
जिसमे स्वदेश का प्यार नही.



नमन है देश के उस सरदार को,
एक किया जिसने, देश की एकता के तार को


जिसने बारदोली सत्याग्रह की बागडोर ली थी 
सफलता की ख़ुशी में, लोगो ने सरदार की उपाधि दी थी। 
रियासतों के एकीकरण से अखंड भारत बनाया था
लौहपुरुष बनकर राजे - रजवाड़ो को मनाया था 
हालांकि आजादी के बाद रियासतों की समस्या भरी थी
पर एक करने वाले सरदार की लीला सबको प्यारी थी.


ना बम गिराया , ना खून बहाया मगर
एक कर दिया हर राजा की तलवार को 
नमन है देश के उस सरदार को
एक किया जिसने देश की एकता के तार को. 


देश ऐसे ही वीर सपूतों का कर्जदार है , हमें नतमस्तक होकर ऐसे वीर सपूतो को आदर और सम्मन देना चहिये.


जय हिन्द !
जय भारत !

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